Contract Employees Supreme Court Order: सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों के हक में एक अहम फैसला सुनाया है, जिससे देशभर के लाखों संविदा और अस्थायी कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर किसी कर्मचारी से लंबे समय तक लगातार काम लिया जाता है, तो उस पद को स्थायी माना जाएगा। यानी ऐसे कर्मचारियों को केवल अस्थायी बताकर हटाया नहीं जा सकता। यह फैसला कानपुर नगर निगम के स्विचमैन कर्मचारियों से जुड़े मामले में आया है, जहां कई सालों तक काम करने के बावजूद कर्मचारियों को स्थायी दर्जा नहीं दिया गया था।
लंबे समय तक सेवा को कैसे देखा कोर्ट ने
कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अगर कोई कर्मचारी लगातार कई सालों तक बिना रुकावट काम करता है, तो यह इस बात का संकेत है कि उस पद की जरूरत स्थायी रूप से थी। बता दें कि इस मामले में कर्मचारी 1993 से 2006 तक लगातार काम कर रहे थे, यानी करीब 12-13 साल तक उनकी सेवाएं ली गईं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इतने लंबे समय तक काम लेना और फिर उसे अस्थायी बताना सही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह दिखाता है कि वहां नियमित नियुक्ति होनी चाहिए थी और काम भी स्थायी प्रकृति का था।
हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बदला
इस केस में पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के खिलाफ फैसला दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे पलट दिया। वहीं न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने साफ कहा कि कर्मचारियों के साथ अन्याय हुआ है। कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी प्रभावित कर्मचारियों को वापस नौकरी पर रखा जाए। इससे यह भी साफ हो गया कि अगर लंबे समय तक सेवा लेने के बाद कर्मचारियों को हटाया जाता है, तो अदालत इस पर गंभीरता से विचार करती है और जरूरत पड़ने पर पुराने फैसले भी बदले जा सकते हैं।
दस्तावेज न देने पर कर्मचारी के पक्ष में जाएगा मामला
इस मामले में एक और अहम पहलू सामने आया, जब नगर निगम कर्मचारियों की उपस्थिति से जुड़े रिकॉर्ड पेश नहीं कर सका। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई संस्था जरूरी दस्तावेज अदालत में पेश नहीं करती है, तो इसका फायदा कर्मचारी को दिया जाएगा। यानी कर्मचारी जो दावा कर रहा है, उसे सही माना जा सकता है। कानून में इसे प्रतिकूल अनुमान कहा जाता है, जिसका मतलब है कि रिकॉर्ड छिपाने या न दिखाने की जिम्मेदारी संस्था की मानी जाएगी और इससे कर्मचारी का पक्ष मजबूत होता है।
बहाली का आदेश, लेकिन वेतन पर अभी फैसला बाकी
सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों की बहाली का आदेश तो दे दिया है, लेकिन उनके बकाया वेतन को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। कोर्ट ने कहा कि यह जांचना जरूरी है कि जिन कर्मचारियों को हटाया गया था, क्या वे उस दौरान कहीं और काम कर रहे थे या नहीं। इसी आधार पर उनके वेतन का फैसला लिया जाएगा। इस मुद्दे पर आगे की सुनवाई के लिए मामला फिर से हाईकोर्ट भेज दिया गया है, ताकि पूरी जानकारी के आधार पर निर्णय लिया जा सके।
देशभर के कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा
यह फैसला सिर्फ कानपुर नगर निगम के कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के संविदा और अस्थायी कर्मचारियों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बता दें कि कई विभागों और संस्थानों में सालों तक कर्मचारियों से काम लिया जाता है, लेकिन उन्हें स्थायी दर्जा नहीं दिया जाता और अचानक नौकरी से हटा दिया जाता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एक मजबूत आधार देता है कि लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारियों को अधिकार मिल सकते हैं और उन्हें स्थायी मानने की मांग को कानूनी समर्थन मिल सकता है।


